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Thursday, November 1, 2012

I'm Dead, I'm Still Alive | Sad Poems


ख्वाबोँ की किताबेँ रोज उलटता हूँ,
उन किताबोँ मेँ छिपी यादोँ की कश्तियाँ ढूँढता हूँ,
हकीकत के पन्ने रोज पलटता हूँ,
मैँ वीरानोँ का बाशिँदा हूँ,
अपनी बरबादिया रोज़ लिखता हूँ,
रोज सपनेँ बूनता हूँ,
फिर उन्हेँ तोड़ता हूँ,
आँखोँ से आंसुओँ को चुनता हूँ
हर एक तनहा पल को गिनता हूँ,
मर चुका हूँ फिर भी जिन्दा हूँ,
मैँ वीरानो का बाशिँदा हूँ,
अपनी बरबादिया रोज़ लिखता हूँ,
हर रोज सपनेँ बूनता हूँ,
फिर उन्हेँ तोड़ता हूँ !

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