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Saturday, January 5, 2013

Alone In Crowd


बारिशें गिरती है,
आँखों में रोज़ सपने टूटते हैं,
आँखों से आंसुओ की नदिया फूटती है,
बारिशें गिरती है,
पर बस आँखों के सिवाय कुछ भीगा ही नहीं,
जिस फूल की खुशबु को सांसो में,
बसा लेने के लिए बैठे रहते थे,
वो फूल तो कभी खिला ही नहीं,
मैं आया था तब भी अकेला था,
अब भी तनहा हूँ...
और अकेले ही जाना होगा,
इस दुनिया की भीड़ में,
मुझे तो कोई साथी मिला ही नहीं,
जिस प्यार को जिंदगी भर,
दिल में बसाये रखा,
वो प्यार तो एक पल के लिए भी,
कभी मिला ही नहीं,
ख्वाबो के सिवाय कहीं और,
खुद से मिला ही नहीं,
मैं वो मुसाफिर हूँ,
शायद जिसे मंजिल ढूंढ रही है,
 खुदा मुझे तेरे इन इरादों से,
कोई गिला नहीं !



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