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Friday, April 11, 2014

Dil Ko Karaar

♥♥ वो नज़रे झुकाये खड़ी थी,
कैसे देखते इश्क तो उसकी आँखों में था,
लब भी कुछ कह ना सके,
मेरा हाथ जो उनके हाथों में था ♥♥
♥♥ कैसे चुरा लेता मैं नींद उसकी,
मेरा हर ख्वाब जो उसकी नींदों में था,
जो सुकून ज़िन्दगी ना दे सकी,
वो मज़ा उसकी यादों में काटी तनहा रातों में था...
♥♥ कैसे खोल देता राज़ इश्क के,
हर राज़ तो छिपा उसकी जुल्फों में था,
जो खुशबू फूलों में ढूंढते रहे,
उस खुशबू का एहसास तो उसकी साँसों में था ♥♥
♥♥ ये सोचकर रोक लिए बहते अश्क आँखों से,
की कही खो ना दू उसकी अदाओ को,
उसका हर अंदाज़ जो मेरी आँखों में था ♥♥
♥♥ कह ना पाये दिल की बात उनसे,
वो भी ना जान सके हालात दिल के,
बस सुनते रहे उसके किस्सों को,
दिल का धडकना जो उसकी बातों से था ♥♥
♥♥ कैसे भूला दूँ बीतें लम्हों को,
दिल को करार जो उसकी यादों से था,
उसके इंतज़ार में टूटती साँसों को थाम रखा है,
अब जीना-मरना तो उसके ख़्वाबों में था ♥♥

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