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Monday, April 14, 2014

हर राह पर इश्क के

♥♥ वफ़ा ढूँढने चले थे,
हर राह पर इश्क के खरीददार निकले,
जिसे हम प्यार की मूरत समझ बैठे थे,
वो बाज़ार-ए-इश्क के सबसे बड़े ज़मींदार निकले ♥♥

Poetry Written By - MS Mahawar

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