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Saturday, September 6, 2014

कैसे कह दूँ की मैं अधुरा हूँ | Love Poems

कैसे कह दूँ की मैं अधुरा हूँ,
तू जो मुस्कुरा दे तो मैं पूरा हूँ,
मुझे तू यूँ ना पुकार मैं रो दूंगा,
तेरी तस्वीर जो मेरी आँखों में बसी है,
उसे भी अश्को के साथ खो दूंगा ·

कैसे कह दूँ की मैं अधुरा हूँ,
तू जो एक नज़र देख ले मुझे,
तो मैं फलक पे चमकता हुआ एक सितारा हूँ,
कैसे कह दूँ की मुझे ज़िन्दगी से कोई ग़म है,
तू जो हो साथ मेरे,
तो जीने के लिए ये ज़िन्दगी भी कम है ·

कैसे कह दूँ की मैं एक खामोश लम्हा हूँ,
तेरे लब्ज़ जो छू ले नाम मेरा,
तो मैं एक खूबसूरत कलमा हूँ,
कैसे कह दूँ की तेरे बिन मैं तनहा हूँ,
तेरे यादें जो दिल के दरवाजों को खटखटाये,
तो मैं एक मुस्कुराहता हुआ लम्हा हूँ ·

कैसे कह दूँ की मैं खुद से जुदा हूँ,
तू जो चुपके से एक नज़र देखें मुझे,
तेरी यादें जो भीगों दे पलकें मेरी तो लगे जैसे,
मैं अब भी शायद तेरी यादों में कहीं जिन्दा हूँ
कैसे कह दूँ की मैं अधुरा हूँ,
तू जो मेरे ख़्वाबों में चली आये,
तो मैं पूरा हूँ ·



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