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Thursday, January 22, 2015

Manzil | Lovelorn Poetry


वो हमे भूल गए हैं ,
मंजिल का पता बताकर,
और हम आज भी मंजिल को नहीं,
उन्हें ढूँढ रहे हैं ♥♥


7 comments:

  1. वो न भुला था तुझे,
    बस तेरे इंतज़ार में वो थक गया.
    तूने आने में इतनी देर कर दी,
    कि वो तेरा इंतज़ार करते करते चला गया...

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    1. धन्यवाद् माहवार साहब...

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  2. The never ending search..lovely ! :)

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