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Thursday, March 26, 2015

Khuda Ne Likhi Hi Nahi | Love Poems


खुदा ने लिखी ही नहीं,
मेरी ज़िन्दगी में महोब्बत किसी की,
दर्द में तड़पना ही मुकद्दर है मेरा,
मेरे नसीब में कहा हँसी तेरे लबों जैसी ♥♥

तेरे होने से आँखों में,
आज फिर ये नमी है कैसी,
तुझे देखकर आज फिर,
दिल पे छा गयी है ख़ामोशी सी ♥♥

तुझसे प्यार करूँ या फिर इनकार करूँ,
फिर दिल ने की है महोब्बत की साजिशें ऐसी,
मेरी तो हर सांस भी अधूरी है,
और चाहत भी अधूरी सी,
क्यों तुझे छूकर लगे की तू है ज़िन्दगी सी ♥♥

मैं तो दर्द का मारा हूँ,
ख्वाहिशों में टूटा सितारा हूँ,
मेरी ज़िन्दगी में तो दो पल की महोब्बत है,
और फिर ज़िन्दगी ही अज़नबी सी ♥♥

साँसों को सुकून कहाँ है,
अब जीने का जूनून कहाँ है,
मेरी तो ज़िन्दगी ही है मदहोशी सी,
क्यों तुझे देखकर लगे की तू है ख़ुशी सी ♥♥

तू पूरा चाँद है,
मेरी ज़िन्दगी तो है सुनी रात सी,
मैं तो अधुरा लब्ज़ हूँ,
और तू दिल को छू जाये उस बात सी ♥♥

मेरी ज़िन्दगी ही बेरंग है,
तू है ज़िन्दगी के हर रंग सी,
मैं एक चुभती धुप हूँ,
और तू सुकून देती शाम सी ♥♥

मैं एक कड़वा सच हूँ,
और तू एक हसीन ख्व्वाब सी,
मैं एक बहता अश्क हूँ,
और तू रूह को छूती सांस सी ♥♥

मैं तो खामोश लम्हा हूँ,
और तू दिल को सुकून देती आवाज़ सी,
मैं तो एक टूटा सपना हूँ,
और तू खूबसूरत आज सी ♥♥


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