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Saturday, May 23, 2015

Ae Mere Humnashi | Love Poems


ऐ मेरे हमनशी,
कैसी है ये तेरी दिलकशी,
रूठ गयी है ज़िन्दगी भी मुझसे,
खो गयी है हर ख़ुशी ♥♥

क्यों है ये चाहतें,
कैसी है ये बेबसी,
टूट चूका हूँ मैं,
टूट रही है हर सांस भी ♥♥

लब तरसते रहे कुछ कहने को,
बयाँ करती रही आँखों की नमी,
हर टूटा ख्वाब है एक चूभन सा
छिल गयी है दिल की जमीं ♥♥

ऐ मेरे हमनशी,
क्यों है तू हर कहीं,
आँखें अब बंज़र सी है,
ग़ुम है लबों की हँसी ♥♥


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