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Thursday, May 14, 2015

काश वो बचपन फिर आ जाये | unfulfilled desire


वो नंगे पाँव मिटटी में दौड़ना,
फूलों को तोड़कर उनकी खुशबू को साँसों से जोड़ना,
बारिश में भीगना और आसमान को औढना,
काश वो बचपन फिर आ जाये,
कोयल वही गीत गुनगुनाये,
तारे गिनते-गिनते रात गुज़र जाये,
नानी वही कहानियां सुनाये,
काश वो बचपन फिर आ जाये | 

रूह को भीगौती बारिश की बौछारें,
और हिलोरे खाती वो कागज़ की नाव,
खुले आसमान में दौड़ती ज़िन्दगी,
और मिटटी को चुमते नंगे पाँव,
हर राह पे पीछा करता वो सूरज,
और सुकून देती पीपल की छाँव,
तन को छूती ठंडी पवन,
और हरियाली की चादर ओढ़े,
पूरी दुनिया सा वो छोटा सा गाँव |

वो बेपरवाह दौड़ना,
हवाओ का रुख़ मौड़ना,
तितलियाँ पकड़ना,
तो कभी टूटे खिलौनों को जोड़ना,
महफ़िल सा वो पनघट,
गीत गाती वो शाम,
काश वो बचपन फिर आ जाये,
उन बोलते गलियारों से हम फिर गुज़र जाये,
काश वो बचपन फिर आ जाये |

पाँव तले बिखरी वो रंगोलियां,
कुछ सवालों में उलझाती वो पहेलियाँ,
मासूम सी वो अंगड़ाइयाँ,
पीछा करती वो परछाइयाँ,
वो मिटटी के घरों का आशियाना,
दिल को छूती नादानियां,
हर कोई ये गीत गाये,
काश वो बचपन फिर आ जायें,
चाँद दुल्हन की तरह मुँह छिपाये,
तारे गिनते-गिनते रात गुज़र जाये,
काश वो बचपन फिर आ जायें |


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