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Friday, June 26, 2015

Intzaar | Hopeless


जिन्हें सालो से था इंतज़ार वो एक बूँद को तरस गये,
बादल भी अपनी मनमानी में थे, कहीं ओर ही जाके बरस गये |


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4 comments:

  1. इन पंक्तियों को पढ़कर मज़ा आ गया। बड़ी ही सुंदर अभिव्यक्ति।

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    1. ये जानकर हमे भी मज़ा आ गया | शुक्रिया :)

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