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Tuesday, January 19, 2016

ऐ मेहबूब | Hindi Poetry


जितनी तू मुझसे दूर है उतना ही हमारा इश्क़ जवां है,
अब दर्द चाहे कोई भी हो तेरा इश्क़ ही दवा है |
♥♥

हर सांस में मौजूद है तेरी याद ऐ मेहबूब,
रात गुज़र जाती है मगर ख्वाब पूरे नही होते |
♥♥

तू ज़िन्दगी में ना सही मगर आज भी तुझसे उतना ही प्यार है,
तू साथ रहे या ना रहे मगर तू दिल में हमेशा बरकरार है |
♥♥


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