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Thursday, October 27, 2016

Khwaab | Hopeless


ख्वाहिशों का बोझ अब उठाया नहीं जाता,
चीखतें इन ख़्वाबों को अब जलाया नहीं जाता,

पूछता हूँ पता मंज़िलों का खुद से,
जाना बहुत दूर है,
मगर अब कदम उठाया नहीं जाता ।


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