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Monday, January 29, 2018

कभी ऐसा हो | Hindi POETRY


कभी ऐसा हो कि
चाँद भी ठंडी रात के आगोश में जले,
कभी सूरज भी छांव-छांव चले,
कभी ख़ुशबू तड़प कर हवा से गले मिले,
तब मुझे भी तेरी बाहों में बहकने की सज़ा मिले ♥♥


2 comments:

  1. खूबसूरत तराना

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    Replies
    1. शुक्रिया कविता जी :)
      ब्लॉग पे आते रहे आपका हमेशा स्वागत है :)

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