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Saturday, June 9, 2018

चुभन | Unrequited LOVE


उस बहती नदी की
कमर पकड़नी है,
उन परिंदों के साथ
साँसे लेनी है,

उन गुलमोहर के पेड़ो से
कुछ बातें कहनी है,
उन सूखे गुलाबों से
थोड़ी सी खुशबूं छीनी है,

टूटती साँसों के साथ,
अब ये जिंदगी जीनी है
दिल पे थोड़ी चुभन सहनी है,
मैंने आज फिर तेरी याद पहनी है ♥♥


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