Day: October 15, 2018

अँधेरा | हिंदी शायरी

जिसे तू अपना समझ बैठा है, वो तेरा नहीं है, हर इक आदमी के अंदर अँधेरा है, कहीं सवेरा नहीं है |

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ख़्वाहिशें | हिंदी कविता

मैंने ख्वाहिशों को बाँध रखा है, बस तू अपनी जुल्फें संभाल ले ♥♥

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करीब | दिल की बात

श्रुति :- क्या मुझे यूँ ही देखते रहोगे? राजीव :- इतने करीब से पहले कभी चाँद नहीं देखा ना |

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