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Saturday, January 5, 2019

दरख़्त-ए-ज़िंदगी | Rekhta Shayari


दरख़्त-ए-ज़िंदगी से
इक और पत्ता
टूट कर गिर गया,
साल ऐसे गुज़रा
जैसे कोई मेहमाँ आकर
वापस अपने घर गया ।


जुबां | Rekhta


जो बात जुबां से कहनी थी वो इशारों में कह गई,
मिरे हिस्से की मुहब्बत उसकी आँखों में ही रह गई ।


Thursday, January 3, 2019

कमर | Romantic Shayari


उँगलियाँ कमर को छूने को है वो मिरे ज़द में है,
लेकिन मुहब्बत है उनसे और हम अपनी हद में है ।