Aakhiri Saans | Infinite Love

छू
लूँ तुझे कि कोई एहसास हो तुम
,
कोई
नहीं अब सिर्फ दिल के पास हो तुम
 ♥♥
जो
हर पल छूकर गुज़रे वो ज़ज्बात हो तुम
,
तड़प
रही जो कब से उन धड़कनों की आवाज़ हो तुम
♥♥
सुकून
नहीं कहीं जैसे रूह की प्यास हो तुम
,
जिस्म
में जो बची है वो आखिरी सांस हो तुम
 ♥♥



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4 thoughts on “Aakhiri Saans | Infinite Love

  1. i love the rose petals falling…
    They are an icing on cake on this poem

    1. THank you so much, Amita 🙂
      Keep visiting 🙂

  2. छू लूँ तुझे कि कोई अहसास हो तुम……….वाह महावर जी प्यार का जो अहसास आपने अपनी कविता के माध्यम से उकेरा है, वो वाकई बहुत ख़ूबसूरत तरीके से आपने प्रस्तुत किया है…..ऐसी और भी कविताएं आप शब्दनगरी में लिखतें रहें जिससे पाठकों को आपकी कवितायें पढने का आनंद प्राप्त हो……..

    1. बहुत-बहुत शुक्रिया, शुभम 🙂

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