Ae Mere Humnashi | Love Poems

ऐ मेरे हमनशी,
कैसी है ये तेरी
दिलकशी
,
रूठ गयी है
ज़िन्दगी भी मुझसे
,
खो गयी है हर
ख़ुशी
♥♥
क्यों है ये चाहतें,
कैसी
है ये बेबसी
,
टूट
चूका हूँ मैं
,
टूट
रही है हर सांस भी
♥♥

लब तरसते रहे कुछ कहने को,
बयाँ
करती रही आँखों की नमी,
हर
टूटा ख्वाब है एक चूभन सा
छिल
गयी है दिल की जमीं
♥♥

मेरे हमनशी,
क्यों
है तू हर कहीं,
आँखें
अब बंज़र सी है,
ग़ुम
है लबों की हँसी
♥♥


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4 thoughts on “Ae Mere Humnashi | Love Poems

  1. And how romantic is that… 🙂

    1. THank you 🙂 your beautiful and sweet comments always touch my heart.

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