मैं तेरे हर एक ग़म को

मैं तेरी आँखों को नये ख्वाबों से सजा दूंगा,
तेरी जुल्फों को नयी खुशबू से महका दूंगा,
तेरी तस्वीर को मेरी यादों में बसा लूँगा…
ज़िन्दगी अगर कोई दर्द भी दे तुझे,
तो मैं अपनी आँखें भीगो लूँगा,
तू अगर दे इज़ाज़त मुझे,
मैं तेरे हर एक ग़म को,

तेरे दिल से चुरा लूँगा… 

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6 thoughts on “मैं तेरे हर एक ग़म को

  1. True feelings speak. Loved your creation.

    1. Thank you so much 🙂

  2. So much dedication!
    Hope she is reading for whom you have written.

    1. Thanks for the comment and I hope so…

  3. बहुत सुंदर.

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