मेहबूब | एकतरफा प्यार

ये कौन है जो
बिना रुके मेरी ओर आ रहा है,
मेरी नज़र में कैद है जो
मुझसे ही नज़रे छिपा रहा है ♥♥

छुप-छुप कर मोहब्बत की है जिसने,
सरेआम आँखों के इशारों में बुला रहा है,

कभी पलट के नहीं देखता है वो
तो कभी- कभी नज़रें भी मिला रहा है ♥♥
सरेआम जिससे मोहब्बत की है,
वो ख़ुद की पहचान छिपा रहा है,
मेरी जान है वो
वो जो मुझे अनजान बता रहा है ♥♥
उसे मोहब्बत है मुझसे
बेकार ही दिल को समझा रहा है,
मेरा मेहबूब मुझे
मोहब्बत के नुकसान बता रहा है ♥♥


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1 thought on “मेहबूब | एकतरफा प्यार

  1. 😍😍😍😍😍

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