ख़्याल की तस्वीर | Hindi Poetry

1) तुम जो यूँ दिन में
भी चाँद सी खिलती हो
,
क्या चेहरे पर अपने चाँदनी मलती हो
♥♥
2) अब समझा मैं तेरे
गाल पे तिल का मतलब
,
खुदा ने चाँद पे एक सितारा भी सज़ा रखा है
♥♥

3) बड़ी मुश्क़िल से
धड़कनों को संभाला है
,
कहीं तुम फिर से मुस्करा ना दो,
मेरे हसरतों को बड़ी मुश्क़िल से सुलाया है,
कहीं तुम्हारी पायल की खनक से उन्हें जगा ना दो
♥♥

4) जिसकी तलाश हर किसी
को है
,
तुम वो ऐतबार हो,
जिसकी ख़ुशबू से साँसे धूल जाये,
तुम वो गुलज़ार हो
♥♥

5) मुझे देखकर वो अपनी
जुल्फ़ें बांध लेती है
,
वो मेरी हसरतें जान लेती है या वो मेरी ज़ान लेती है
♥♥

6) आईने को इश्क़ ना हो
जाये तेरी नज़रों से
,
तू उसे इतना गौर से देखा ना कर
♥♥

7) दर्द भी मुस्करा
देता है
,
जब वो हँसी बिखेर देती है,
उसकी पायल की खनक,
खामोशियाँ समेट लेती हैं,
शायद घर लौटना उसे पसंद नहीं,
वो तो सबके दिलों में रहती हैं
♥♥

8) चाँद फलक पे नज़र आया
है
,
शायद उसने रुख़ से पर्दा हटाया है,
कह दो धड़कनो को संभलकर चले,
कोई ये शायरियां पढ़कर शर्माया है
♥♥

9) हदे जहाँ खत्म होती
है
,
वहां से तो वो शुरू होती है,
उस फ़ूल की ख़ुशबू है वो,
जो साँसों के लिए ज़रूरी होती है,
ज़िंदगी शायद अधूरी हो,
मगर वो हमेशा पूरी होती है,
आज पिरोया है मैंने दोस्ती को लफ्ज़ों में,
क्योंकि दोस्ती के बिना ज़िंदगी अधूरी होती है
♥♥

10) तुम उस ख़्याल की
तस्वीर हो
,
जिसे किसी ने दिल की दीवारों पे सज़ा रखा है
♥♥

11) चाँद भी तुमसे जलने
लगा है
,
रात का हर पहर जो तेरी जुल्फ़ों तले ढलने लगा है,
पहली गुज़रती थी ज़िंदगी तन्हाइयों के सहारे,
अब तो साया भी तेरे संग चलने लगा है
♥♥

12) दुआ है कि कोई
सिर्फ तेरी आरज़ू करे
,
कोई हो जो तुझे एक पल भी खोने से डरे,
तेरी तस्वीर को वो ख़्वाबों के रंगों से भरे,
तेरे दिल के अँधेरों कोनों में वो प्यार की रोशनी करे
♥♥

13) आईने से ना पूछो,
आईना भी कभी-कभी झूठ बोलता है,
तुम क्या हो कभी उससे जानो,
जो तुम्हे चुप-चुपके देखता है
♥♥

14 ) थोड़ी सी परेशान
थोड़ी सी वो सुलझी,
मगर ख्वाहिशें उसकी,
अब भी तितलियों में उलझी,
रात सारी अश्कों में गुज़ारी,
सुबह वो एक नए फूल सी,
ख्वाहिशों को समेटती वो,
मगर ख्वाहिशें जैसे धूल सी,
ना झुकेगी वो ना रुकेगी वो,
कहानी है ये उसके उसूल की
♥♥

15 ) एक ज़िंदगी कम है
तुम्हें लिखने को
,
मेरी कलम को अब थोड़ा आराम देता हूँ,
तुम तो एक मुकम्मल दरियां हो,
तुम्हे लफ्ज़ो में समेटने की जो कोशिश है,
उसे यही विराम देता हूँ
♥♥
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