कभी ऐसा हो | Hindi POETRY

कभी ऐसा हो कि
चाँद भी ठंडी रात
के आगोश में जले
,
कभी सूरज भी
छांव-छांव चले
,
कभी ख़ुशबू तड़प कर
हवा से गले मिले
,
तब मुझे भी तेरी
बाहों में बहकने की सज़ा मिले
♥♥


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2 thoughts on “कभी ऐसा हो | Hindi POETRY

  1. खूबसूरत तराना

    1. शुक्रिया कविता जी 🙂
      ब्लॉग पे आते रहे आपका हमेशा स्वागत है 🙂

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