ऐतबार | Infinite Love


महोब्बत
कर या ना कर
,
मगर
मेरी महोब्बत पे ऐतबार तो कर
,
मैं
वापस लौटूं या ना लौटूं,
मगर
मेरा थोड़ा इंतज़ार तो कर
 ♥♥
नफ़रतें
तू लाख कर मुझसे मगर
,
थोड़ा मुझसे प्यार भी तो कर,

होठों
से बयां ना हो जज़्बात अगर
,
आँखों
से सही इकरार तो कर
 ♥♥
लिख
दूंगा नाम हर सांस पे तेरा
,
तू
मुझे इश्क में थोडा बेक़रार तो कर
,
हम
तो बैठे है मरने के लिए तेरे इश्क़ में आखिर
,
तू
जुल्फें संवार कर मेरा जीना दुश्वार
 तो कर ♥♥


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4 thoughts on “ऐतबार | Infinite Love

  1. You write so well, passion at its best!

    1. THanks a lot dear 🙂

    1. THank you 🙂

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