Meri Bheegi Aankhein | Lost love

उसने मेरा भी प्यार भरा दिल तोड़ दिया,
शायद उसे उसके हुस्न पे घमंड था |
मेरा दिल उसकी आरज़ू में तड़पता रहा,
मगर उसका दिल तो बेरहम था |
महोब्बत तो एक खेल ही था उसके लिए,
उसके खेल को महोब्बत समझना मेरा कोई भ्रम था | 

महोब्बत करने वाले हजारों मिलेंगे,
उसे शायद उसकी
ख़ूबसूरती पे अहम् था
|
मैंने तो जब से जीना सीखा है,
सिर्फ उसी से महोब्बत की है,
उसे टूट कर भी चाहना मेरा धर्म था |
ख्वाब पूरे होने से पहले ही टूट कर बिखर गये,
शायद ये मेरा ही कोई अधुरा करम था |
उसने मेरी भीगी आँखों को देखकर भी,
मुझसे मुंह मोड़ लिया,
उसका दिल तो आज भी बेशर्म था |


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6 thoughts on “Meri Bheegi Aankhein | Lost love

  1. Some people take years to realize what they have lost. Poignant but beautiful.

    1. This poem is not for any individual. Written for someone else for a reason. By the way THank you for Liking 🙂

  2. उसको तोह अपने हुस्न पर घमंड था, मगर तुझे भी किसी कि तसुवर न थी
    हुस्न कि चाहत में तूने किसी कि चुपके से जान ले ली….

    महावर भाईसाहब कभी कबर हम सब उस चीज कि पीछे भागते हे जो हमारे लायक नहीं मगर इस भाग में उन चीजों को पीछे छोड़े जाते हैं जो हमारे लिए ही बनी थी…. इसलिए हुस्न का पीछा छोड़े और अपने आसपास कही ढूंढें

    1. आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद! लेकिन कभी-कभी ऐसा होता की जो दिखता है वो सही नहीं होता. यहाँ पे भी कुछ ऐसा ही है ये कविता मेरे लिए नहीं है. मेरे किसी मित्र के लिए लिखी हुयी है. ये कविता मेरे लिए नहीं है तो आशा है की आपके सवालो के जवाब आपको मिल गए होंगे. जो लिखा हुआ हो जरुरी नहीं है की वो जिसने लिखा है उस शक्स की ज़िन्दगी से जुड़ा हो. अआपने तो इलज़ाम लगा दिए मुझपे. लेकिन होता है. प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

    2. मुझे खेद हैं माहवार भाईसाहब अगर मेने आपको ठेश पहुचाही हैं तो… मैं बस एक मित्र कि तरह ही सलाह दे रहा था कि कभी कबार उन चीजों का पीछा छोड़ देना चाहिए जो आपको दुःख पहुचाए… अगर वोह आपकी किस्मत हैं तोह वापिस फिर लौट के जरुर आएगी नहीं तोह उसे एक गुजरे हुए पल कि तरह भुला देना चाहिए…

    3. कोई बात नहीं. ब्लॉग पर आपका हमेशा स्वागत है 🙂

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