Sang Tere | Zindagi

बेवजह सी हँसी,
ये छिपे हुये
चेहरे
,
जितना दर्द से
निकलो
,
जख्म उतने ही
गहरे
,

कोई नहीं
रुकता यहाँ
,
बस हम ही है
ठहरे
,
ज़िन्दगी ये एक
सागर सी
,
हर दर्द जैसे
उठती लहरे
,

धड़कने जुदा है
दिल से मेरे
,
देखों यहाँ
कितने है पहरे
,
उड़ चलूँ कहीं
संग मैं तेरे
,
तोड़ दूँ अब ये
जंजीरें
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2 thoughts on “Sang Tere | Zindagi

  1. Beautiful poetry:-)

    1. THank you Amit 🙂

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