Tere Iraado Ki Tarah | Lost Love

पेड़ से टूटकर गिरते पत्तों को देखा है,
जैसे टूटते ख़्वाबों की तरह,
हवायें भी कभी दरवाजों से टकराती है,
जैसे दिल को बार-बार छूती तेरी यादों की तरह ♥♥
रूह तेरे एहसास के लिये तरसती है,
जैसे बारिश को तरसते सूखे बागों की तरह,
शाम को जब तन्हाई बेचैन करती है,
तो हर लम्हा गुजरता है जैसे कई सालो की तरह ♥♥

बारिश की बूंदे जब मेरे चेहरे पे ठहरती है,
जैसे मेरे चेहरे पे बिखरते तेरे बालों की तरह,
पूछता हूँ ज़िन्दगी से की इतनी तनहा क्यों है,
मगर ज़िन्दगी भी उलझी हुयी है तेरे कई सवालों की
तरह
 ♥♥
खुद को ढून्ढ रहा हूँ मैं खुद में कहीं,
जैसे खुद जलकर भी रौशनी को तरसते चिरागों की
तरह,
सायां भी साथ छोड़ देता है बदलते वक़्त को देखकर,
जैसे ज़िन्दगी बदल गयी है तेरे इरादों की तरह ♥♥

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2 thoughts on “Tere Iraado Ki Tarah | Lost Love

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