Tum | Hindi Poetry

मैं एक ठहरा
लम्हा हूँ,
और तुम धड़कनों
सी चलती हो,
मैं एक बूँद
को तरसता हूँ,
और तुम नदी सी
बहती हो,
मैं लब्ज़
ढूँढता हूँ,
और तुम आँखों
से सबकुछ कहती हो,
मैं खुद से भी
जुदा हूँ,
और तुम दिल
में रहती हो
♥♥

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6 thoughts on “Tum | Hindi Poetry

  1. lovely MS… as usual… 🙂

    1. THanks Archana maam 🙂

  2. great one once again !! 🙂

    1. THanks Shraddha 🙂

  3. Nice lines.

    1. THanks Anita 🙂

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