बेसब्र | Unrequited LOVE

कोई उसे देखता
है
,
उसे ख़बर नहीं
है
,
मेरी हर नज़र
में है वो
,
मुझे देखे वो
क्या उसके पास
वो नज़र नहीं हैं
,
जो उसकी याद
के बगैर चला हो
,
ऐसा कोई सफ़र
नहीं है
,
मैं बेसब्र
हूँ उसके इंतज़ार में
,
क्या उसकी
आँखों में कोई मंज़र नहीं
,

उसे मांगता
हूँ दुआओं में हर जगह
,
क्या मुझे भी
माँगता है वो
,
उसका ख़ुदा कोई
और है
,
या उसकी दुआओं
में असर नहीं है
|



पल-पल मरता
हूँ उसकी याद में
,
क्या उसके पास
कोई खंज़र नहीं है
|

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2 thoughts on “बेसब्र | Unrequited LOVE

  1. Beautiful and heart wrenching poem.

    1. THanks Purba 🙂
      Keep reading and sharing 🙂

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