Aadatein | Infinite Love

1) रुक रुक कर दिल में जो ये दर्द उठता है,
कोई तो है जो मुझे छूकर गुज़रता है ♥♥
2) तन्हाइयों के सायों में जब ये शाम ढलती है,
तुझे याद कर ये अधूरी ज़िंदगी मुकम्मल सी लगती है ♥♥

3) मर्ज़ इश्क़ का ऐसा कि खुद को भी भूला बैठे,
जो मौजूद ही नहीं उसकी मौजूदगी से दिल लगा बैठे ♥♥
4) इतनी बड़ी दुनिया तेरी और दो पल का प्यार
ना मिला
,
ऐ खुदा ना तू मिला और ना ही कोई यार मिला ♥♥
5) दिल तनहा और मन भी आज सूना है,
ज़िन्दगी को छोड़कर दिल ने आज फिर महोब्बत को चुना है ♥♥
6) कहती मुझे ज़िन्दगी कि मैं आदतें बदल लूँ,
बहुत चला मैं लोगों के पीछे,
अब थोड़ा खुद के साथ चल लूँ ♥♥
7) कितना आसान था किसी से दिल लगाना,
काश उतना ही आसान होता उस शख़्स को भूल जाना ♥♥


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2 thoughts on “Aadatein | Infinite Love

  1. Loved the 6th verse. It's profound and beautiful.

    1. THank you 🙂

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