मैखानों | Adhoora iSHQ

थोड़ी
तिरी आँखों में थोड़ी मैखानों में गुज़रेगी
,
मुहब्बत अभी तो सर चढ़ी है धीरेधीरे उतरेगी ।

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1 thought on “मैखानों | Adhoora iSHQ

  1. ये क्या सोचेंगे ? वो क्या सोचेंगे ?
    दुनिया क्या सोचेगी ?
    इससे ऊपर उठकर कुछ सोच, जिन्दगीं सुकून
    का दूसरा नाम नहीं है
    kaka ki shayari

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