Befikra | Hindi Poetry

शिकायतें ना रख तू दिल में,
जो पत्थर है वो कहाँ सुन पायेंगे,

तू हवा की तरह बेफिक्र बहता चल,
जो खुशबूं होंगे वो तुझमें सिमटते जाएंगे ♥♥



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2 thoughts on “Befikra | Hindi Poetry

    1. Shukriya!

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