महताब | रोमांटिक शायरी


चेहरे पे भीगी जुल्फें
जैसे बारिश में भीगा महताब,
उसके होंठ
जैसे सर्दियों में ठंडे-ठंडे
गुलाब
,
उसकी साँसें
जैसे हलक से नीचे उतरती शराब,
उसकी झुकती पलकें
जैसे रूख़ पे हया का हिजाब,
उसकी ख़ामोशी 
जैसे अधूरे इश्क के,
अधूरे पते पे भेजे,
अधूरे लिखे जवाब ♥♥

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2 thoughts on “महताब | रोमांटिक शायरी

  1. Bahut sundar… Golden lines of romanticism… well penned… 🙂

    1. THank you so much, Ashish 🙂
      Your words means a lot!

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