Intzaar | Hopeless

जिन्हें सालो से था इंतज़ार वो एक बूँद को तरस गये,
बादल भी अपनी मनमानी में थे, कहीं ओर ही जाके
बरस गये
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4 thoughts on “Intzaar | Hopeless

  1. इन पंक्तियों को पढ़कर मज़ा आ गया। बड़ी ही सुंदर अभिव्यक्ति।

    1. ये जानकर हमे भी मज़ा आ गया | शुक्रिया 🙂

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