Khwaab | Hopeless

ख्वाहिशों का बोझ
अब उठाया नहीं जाता
,
चीखतें इन
ख़्वाबों को अब जलाया नहीं जाता
,
पूछता हूँ पता
मंज़िलों का खुद से
,
जाना बहुत दूर है,
मगर अब कदम उठाया
नहीं जाता ।


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