दरिया-ए-इश्क़ | Love Quotes

बड़े शौक से चले थे महोब्बत करने ऐ ज़िन्दगी,
ना महोब्बत रही और ना ही अब कोई शौक बाकी रहा |
♥♥

तकलीफों में वो दम कहाँ जो मुझे तोड़ देती,
ये तो महोब्बत थी अब बिना तोड़े कैसे छोड़ देती |

♥♥

कसूर तेरा नही शायद में ही महोब्बत के काबिल नही था,
मैं ही उस कश्ती में जा बैठा जिसका कोई साहिल नही था |
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कितना आसान था किसी से दिल लगाना,
काश उतना ही आसान होता उस शख़्स को भूल जाना |
♥♥

खुद को खो दिया मैंने ज़माने को आजमाने में,
शायद बहुत देर कर दी मैंने वापस घर लौट जाने में |
♥♥

ज़िन्दगी भी रूठ गयी मगर अब भी दिल में थोड़ा प्यार बाकी है,
शायद इस दर्द की दुनिया में मेरा अभी कुछ उधार बाकी है |
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पूछा मैंने साहिल से कि दरिया-ए-इश्क़ के पार चलोगे,
कह दिया उसने साफ़ लफ़्ज़ों में कि तैरना आता है या फिर डूब कर मरोगे |

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8 thoughts on “दरिया-ए-इश्क़ | Love Quotes

  1. wow… wonderful lines MS 🙂

    1. THank you so much, Archana ma'am 🙂

  2. Lovely and Soulful Poetry.

    1. THank you so much 🙂

  3. Beautiful poetry

    1. THanks Kishor 🙂

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