Manzil | Lovelorn Poetry

वो हमे भूल गए हैं ,
मंजिल का पता बताकर,
और हम आज भी मंजिल को नहीं,
उन्हें ढूँढ रहे हैं ♥♥
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7 thoughts on “Manzil | Lovelorn Poetry

  1. वो न भुला था तुझे,
    बस तेरे इंतज़ार में वो थक गया.
    तूने आने में इतनी देर कर दी,
    कि वो तेरा इंतज़ार करते करते चला गया…

    1. Waah Bahut Khoob 🙂

    2. धन्यवाद् माहवार साहब…

  2. The never ending search..lovely ! 🙂

    1. Thanks. Glad you like it 🙂

  3. Wah wah! bahut khoob!

    1. THanks Namrata 🙂

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