Mujhe Aisi Jaagir | Shayari

जो महोब्बत को दौलत से तौल दे,
मुझे ऐसी जागीर पसंद नहीं,
जो ज़िन्दगी भर का साथ पल भर में छोड़ दे,
मुझे ऐसे राहगीर पसंद नहीं |
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6 thoughts on “Mujhe Aisi Jaagir | Shayari

  1. ये उसकी गलती नहीं, ये तो तेरा ही गुनाह था…
    उसको क्या दोष देता हैं, ऐसा कुछ होगा ये तुझे भी पता था…

    1. What to say! Thanks for your comment!

  2. Well expressed 🙂

    1. THanks. Glad you like it 🙂

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