मैखानों | Sad Shayari

गुलाब
चुभने लगे हैं
,
अब काँटों से मुहब्बत की जाय,
वस्ल होता तो आँखों से पीते,
तिरे हिज़्र में मैखानों में पी जाय ।
Tagged , , , ,

1 thought on “मैखानों | Sad Shayari

  1. क्या आप बज़ट के अभाव में अपनी पुस्तक प्रकाशित नहीं करा पा रहे है? या आपको तकनीकि जानकारी नहीं है जिस कारण Do it Yourself (DIY) जैसी योजनाओं में भी आप पुस्तक प्रकाशित नहीं करा पा रहे है।
    हम जानते है लेखकों के साथ ऐसी कई समस्याएं होती है, इसलिए ऐसी कई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए हम आपके लिए लाएं है स्पेशल स्वयं प्रकाशन योजना। इस योजना को इस प्रकार तैयार किया गया है कि लेखक पर आर्थिक बोझ न पड़े और साथ ही लेखक को उचित रॉयल्टी भी मिले।

    हमारा प्रयास है कि हम लेखकों का अधिक से अधिक सहयोग करें।

    अधिक जानकारी के लिए विजिट करें – https://www.prachidigital.in/special-offers/

    हम नंबर 1 नहीं है, लेकिन लेखक को निराश नहीं होने देते है – प्राची डिजिटल पब्लिकेशन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *