Sitaaro Mein | Infinite Love

टूट कर यही मैं इन हवाओं में बिखर जाऊँगा,
अपनी बाहें तू खोल कर रखना,
मैं तिनका-तिनका तुझ में सिमट जाऊँगा ♥♥

मर कर भी मैं तुझसे दूर ना जाऊँगा,
कभी रात में अपनी खिड़की से झांकना तू,
मैं तुझे टूटते सितारों में नज़र आऊंगा ♥♥

जब चाँदनी छुयेगी तेरी हर अक्स को,
मैं तेरी हर सांस को चूमता हुआ,
तेरी रूह में समा जाऊँगा ♥♥

कोई दर्द ना हो तुझे,
मैं तेरे सामने ना आऊंगा,
मगर हवा बनकर तेरी जुल्फें सहलाउंगा ♥♥


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6 thoughts on “Sitaaro Mein | Infinite Love

  1. Heart touching composition. keep on writing such longer poems. 🙂

    1. THank you so much, Pranju 🙂
      Keep visiting!

  2. Beautiful poetry:-)

    1. THank you Amit 🙂

  3. wow! Beautiful and so touching 🙂

    1. THank you so much, Purba 🙂

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